
यूरीड मीडिया- प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एलडीए के खाली प्लॉट अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं। जिनके लंबे अरसे से प्लॉट खाली पड़े हैं, उन्हें जरूर पता कर लेना चाहिए कि उनके प्लॉट्स की फर्जी रजिस्ट्री तो नहीं हो गई, क्योंकि लखनऊ में एलडीए प्लॉटों का फर्जी कागजात तैयार करके रजिस्ट्री करने वाला एक बहुत बड़ा गिरोह को एसटीएफ ने पकड़ा भी है। अभी तक 80 प्लॉट की फर्जी रजिस्ट्री करने का पर्दाफाश हुआ है।
प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले जिन क्षेत्रों में खाली पड़े प्लॉटों की रजिस्ट्री फर्जी तरीके से की गई है, उनमें गोमती नगर के विकल्प खंड, विशेष खंड, विभूति खंड, विनीत खंड, विराट खंड, विवेक खंड, विराज खंड, विनम्र खंड, विभव खंड, विजयंत खंड और सेक्टर जी, सेक्टर आई कानपुर रोड योजना, सेक्टर एच जानकीपुरम योजना, सेक्टर जी सीतापुर रोड के प्लॉट शामिल हैं। अभी तक फर्जी रजिस्ट्री करने वाले गिरोह के अचलेशर गुप्ता, राम बहादुर सिंह, सचिन सिंह, मुकेश मौर्य, राहुल सिंह और धनंजय सिंह शामिल हैं।
लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में अगर आप देखना शुरू करें तो हर खंड में लगभग तीन-चार मकानों के बीच एक प्लॉट बरसों से खाली पड़ा हुआ है। मालिक कौन है, इसके पड़ोस वालों को भी जानकारी नहीं है। ऐसे ही खाली पड़े प्लॉटों की जानकारी एलडीए के बाबुओं से ली जाती है और उसका विस्तृत विवरण लिया जाता है। इसमें एलडीए के कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है।
प्लॉट की डिटेल मिलने के बाद उसकी फर्जी रजिस्ट्री तैयार की जाती है। फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर गिरोह के सदस्य एलडीए के माध्यम से यह जानकारी भी एकत्र कर लेते हैं कि कौन-कौन से लोग प्लॉट खरीदना चाहते हैं। इन लोगों से संपर्क करके फर्जी मालिक, जिनके नाम पर रजिस्ट्री बनाई गई है, से रजिस्ट्री कराते हैं।
अभी तक जिन 80 प्लॉटों की रजिस्ट्री हुई है, उनकी कीमत करोड़ों में है। वैसे यह एलडीए के भ्रष्टाचार का बहुत छोटा सा उदाहरण है। किस स्तर पर और कितना बड़ा घोटाला एलडीए की फाइलों में दफन हो चुका है और हर वर्ष भ्रष्टाचार के नए तरीके ढूंढ लिए जाते हैं। प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले खाली पड़े हजारों प्लॉट भी भ्रष्टाचारियों से जुड़े हुए हैं, क्योंकि सामान्य व्यक्ति जिसे जीवन में एक मकान बनाने की ख्वाहिश होती है, उसके ये प्लॉट नहीं हो सकते।
यह अधिकांश प्लॉट उन लोगों के हैं, जिन्होंने अकूत संपत्ति पैदा करके कई मकान एवं प्लॉट खरीदे हैं। बहुत सारे प्लॉट इसमें बेनामी भी होंगे। प्राधिकरण में ऐसे काले कारनामों वाले भ्रष्टाचारियों की जानकारी भी प्राधिकरण के भ्रष्ट बाबुओं को रहती है, जिनके माध्यम से बेनामी प्लॉट लिए गए हैं।
लखनऊ विकास प्राधिकरण में तैनात रहे एक अभियंता का कहना है कि प्राधिकरण की गतिविधियां केवल मध्यम श्रेणी और कमजोर वर्ग पर नियम-कानून लागू करना है। नक्शा पास करने से लेकर जितने भी प्राधिकरण के कानून हैं, वे कमजोर लोगों पर लागू हो रहे हैं। अधिकारी, नेता और दूसरे जो ताकतवर लोग हैं, उनके लिए प्राधिकरण का नियम-कानून नहीं होता है।
अभियंता का कहना था कि बड़ी-बड़ी कोठियां जो ताकतवर लोगों की बिना नक्शा और नियमों के विपरीत बनती रहती हैं, उनकी रिपोर्ट जब सक्षम अधिकारी को दी गई तो कार्रवाई कराने से मना कर दिया गया। जबकि छोटे-छोटे कमजोर लोगों के मकान पर सारे नियम-कानून लागू किए जाते हैं, उन्हें सील किया जाता है और परेशान किया जाता है। प्राधिकरण लूट-डकैती की अकादमी बन गई है।
हर बार जो भी सरकार आती है, प्राधिकरण में अधिकारी आता है, वह केवल लैंड बैंक बढ़ाने की बात करता है क्योंकि उसी में अरबों की लूट की गुंजाइश होती है। यह बात सही भी है कि जब भी बोर्ड की बैठक होती है, प्राधिकरण की आय बढ़ाने के नाम पर केवल क्षेत्र बढ़ाने और किसानों की जमीन अधिग्रहण करने की रणनीति बनाई जाती है। इसका फायदा भी नेता और अधिकारी उठाते हैं।
प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले जिन क्षेत्रों में खाली पड़े प्लॉटों की रजिस्ट्री फर्जी तरीके से की गई है, उनमें गोमती नगर के विकल्प खंड, विशेष खंड, विभूति खंड, विनीत खंड, विराट खंड, विवेक खंड, विराज खंड, विनम्र खंड, विभव खंड, विजयंत खंड और सेक्टर जी, सेक्टर आई कानपुर रोड योजना, सेक्टर एच जानकीपुरम योजना, सेक्टर जी सीतापुर रोड के प्लॉट शामिल हैं। अभी तक फर्जी रजिस्ट्री करने वाले गिरोह के अचलेशर गुप्ता, राम बहादुर सिंह, सचिन सिंह, मुकेश मौर्य, राहुल सिंह और धनंजय सिंह शामिल हैं।
लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में अगर आप देखना शुरू करें तो हर खंड में लगभग तीन-चार मकानों के बीच एक प्लॉट बरसों से खाली पड़ा हुआ है। मालिक कौन है, इसके पड़ोस वालों को भी जानकारी नहीं है। ऐसे ही खाली पड़े प्लॉटों की जानकारी एलडीए के बाबुओं से ली जाती है और उसका विस्तृत विवरण लिया जाता है। इसमें एलडीए के कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है।
प्लॉट की डिटेल मिलने के बाद उसकी फर्जी रजिस्ट्री तैयार की जाती है। फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर गिरोह के सदस्य एलडीए के माध्यम से यह जानकारी भी एकत्र कर लेते हैं कि कौन-कौन से लोग प्लॉट खरीदना चाहते हैं। इन लोगों से संपर्क करके फर्जी मालिक, जिनके नाम पर रजिस्ट्री बनाई गई है, से रजिस्ट्री कराते हैं।
अभी तक जिन 80 प्लॉटों की रजिस्ट्री हुई है, उनकी कीमत करोड़ों में है। वैसे यह एलडीए के भ्रष्टाचार का बहुत छोटा सा उदाहरण है। किस स्तर पर और कितना बड़ा घोटाला एलडीए की फाइलों में दफन हो चुका है और हर वर्ष भ्रष्टाचार के नए तरीके ढूंढ लिए जाते हैं। प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले खाली पड़े हजारों प्लॉट भी भ्रष्टाचारियों से जुड़े हुए हैं, क्योंकि सामान्य व्यक्ति जिसे जीवन में एक मकान बनाने की ख्वाहिश होती है, उसके ये प्लॉट नहीं हो सकते।
यह अधिकांश प्लॉट उन लोगों के हैं, जिन्होंने अकूत संपत्ति पैदा करके कई मकान एवं प्लॉट खरीदे हैं। बहुत सारे प्लॉट इसमें बेनामी भी होंगे। प्राधिकरण में ऐसे काले कारनामों वाले भ्रष्टाचारियों की जानकारी भी प्राधिकरण के भ्रष्ट बाबुओं को रहती है, जिनके माध्यम से बेनामी प्लॉट लिए गए हैं।
लखनऊ विकास प्राधिकरण में तैनात रहे एक अभियंता का कहना है कि प्राधिकरण की गतिविधियां केवल मध्यम श्रेणी और कमजोर वर्ग पर नियम-कानून लागू करना है। नक्शा पास करने से लेकर जितने भी प्राधिकरण के कानून हैं, वे कमजोर लोगों पर लागू हो रहे हैं। अधिकारी, नेता और दूसरे जो ताकतवर लोग हैं, उनके लिए प्राधिकरण का नियम-कानून नहीं होता है।
अभियंता का कहना था कि बड़ी-बड़ी कोठियां जो ताकतवर लोगों की बिना नक्शा और नियमों के विपरीत बनती रहती हैं, उनकी रिपोर्ट जब सक्षम अधिकारी को दी गई तो कार्रवाई कराने से मना कर दिया गया। जबकि छोटे-छोटे कमजोर लोगों के मकान पर सारे नियम-कानून लागू किए जाते हैं, उन्हें सील किया जाता है और परेशान किया जाता है। प्राधिकरण लूट-डकैती की अकादमी बन गई है।
हर बार जो भी सरकार आती है, प्राधिकरण में अधिकारी आता है, वह केवल लैंड बैंक बढ़ाने की बात करता है क्योंकि उसी में अरबों की लूट की गुंजाइश होती है। यह बात सही भी है कि जब भी बोर्ड की बैठक होती है, प्राधिकरण की आय बढ़ाने के नाम पर केवल क्षेत्र बढ़ाने और किसानों की जमीन अधिग्रहण करने की रणनीति बनाई जाती है। इसका फायदा भी नेता और अधिकारी उठाते हैं।
28th March, 2025